कल तो जो यहीं थी

मिट्टी के से थे वो ख्वाब, तू जिनमें धागे बुन रही थी, वो जो नही है अब आज, कल तो जो यहीं थी, ग़म में है दुनिया सारी, बस मेरा गम जो कम है, कुछ मिल घुमिल कर तेरी यादें, मेरे ज़ख्मों पर मरहम है, टूट बिखर कर मैने चलकर, जिंदगी को है थाम लिया, … Continue reading कल तो जो यहीं थी